Saturday, February 29, 2020

मुस्करा कर आगे निकल

 रास्ता तय नहीं
मंज़िल है नहीं
हमसफ़र की तलाश क्यूं
न मिला,तो हताश क्यूं
है कोई दूर तक
कोई पास तक
न है कोई आखिरी 
सांस तक
तू इस राह का 
अकेला पथिक है
लंबा नहीं रास्ता यूं
सोचेगा, तो लगेगा
अधिक है।
कट जाएंगे
मुश्किल के पल
तू मुस्करा कर
आगे निकल

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