Saturday, February 29, 2020

तो खाक बात हुई

सुना है ग़ज़ब का लिखते हो तुम
लफ्जो में माहिर दिखते हो तुम
आज दर्द का माहौल है
 घर लोगो के जल रहे
दोस्त भी दुश्मनों से खल रहे
और जो न बन सके आवाज़ तुम आवाम की
तो  खाक बात हुई।

है मालूम कि सबको अज़ीज़ हो
मोहब्बत के मारो के ख़ुदा हो
लोग वाह वाही है वारते
एक और एक और है पुकारते
कई शक्स और हसीनाएं भी
शायद तुम पर फ़िदा हो
जो लिख न पाए बात किसी काम की
तो  खाक बात  हुई।

ता उम्र लिखते रहे 
मोहब्बत के अफसाने
गूंजते रहते है शायरी से
महफ़िल और महखाने
पर और भी दर्द है मोहब्त के सिवा
जो न बन सके किसी की दवा
कोई ग़ज़ल न कह पाए आराम की
तो खाक बात हुई।



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