i am an average
Saturday, February 29, 2020
मुस्करा कर आगे निकल
रास्ता तय नहीं
मंज़िल है नहीं
हमसफ़र की तलाश क्यूं
न मिला,तो हताश क्यूं
है कोई दूर तक
कोई पास तक
न है कोई आखिरी
सांस तक
तू इस राह का
अकेला पथिक है
लंबा नहीं रास्ता यूं
सोचेगा, तो लगेगा
अधिक है।
कट जाएंगे
मुश्किल के पल
तू मुस्करा कर
आगे निकल
तो खाक बात हुई
सुना है ग़ज़ब का लिखते हो तुम
लफ्जो में माहिर दिखते हो तुम
आज दर्द का माहौल है
घर लोगो के जल रहे
दोस्त भी दुश्मनों से खल रहे
और जो न बन सके आवाज़ तुम आवाम की
तो खाक बात हुई।
है मालूम कि सबको अज़ीज़ हो
मोहब्बत के मारो के ख़ुदा हो
लोग वाह वाही है वारते
एक और एक और है पुकारते
कई शक्स और हसीनाएं भी
शायद तुम पर फ़िदा हो
जो लिख न पाए बात किसी काम की
तो खाक बात हुई।
ता उम्र लिखते रहे
मोहब्बत के अफसाने
गूंजते रहते है शायरी से
महफ़िल और महखाने
पर और भी दर्द है मोहब्त के सिवा
जो न बन सके किसी की दवा
कोई ग़ज़ल न कह पाए आराम की
तो खाक बात हुई।
Friday, February 28, 2020
sand and sea
You pull me into your ebb
Me,as wet sand succumb,
How much I want to resist
Your allure makes me go numb.
I secretly wish to settle
Into your deep abyss,
But when you are high
Am thrown on the shore, amiss
Do you think,I remain same
The contours,the salinity differs
Still,Nothing has changed for years
I still get pulled
breaking my quiescence
As your wave nears.
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