तुझसे प्यार कैसे हो गया...
अहत की थी अब
और ज़ुल्म न करेंगे
इस मासूम दिल पर
दरकार नहीं अब और किसी की
सोचा था
सोचा था मगर आज इतना
फ़िर लाचार कैसे हो गया...
करार खोता था पहले भी दिल का
पर हर बार नमाकूल
बेख्याली से निकल ही आया
संभल संभल के चल रहें थे कि
न जाने आज क्यूँ
ये ख़ुमार कैसे हो गया.....
No comments:
Post a Comment