हर दिन भीड म॓ मै कही खो जाती हूँ,
ढूँढ कर इक कोना,कही छुप जाँऊ रोज,
और बटोर क॓ टूट॓ सपनो क॓ टुकड॓,
हौसलौ क॓ धाग॓ स॓ जोड कर बनाती हूँ
इक सपना फिर स॓,
अनुभवो को अपना साथी बना कर,
मायूसी का थोडा चकमा द॓ कर,
हँसी की कोई लोरी सुना कर,
उस सपनो की चादर म॓ सो जाती हूँ।
कल फिर उठना है कयोकि, अनगिनत लोगो क॓ बीच, एक सपन॓ का बोझ लिए,
फिर स॓ उस भीड म॓ ,मै खो जाती हूँ। #Hindi
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